कुर्सी का युद्ध-1 (चुनाव विशेष)

 काफी लम्बे समय बाद आपके सामने उपस्थित हुआ हूँ, इसके लिए माफ करना पर समय नहीं मिल रहा था, पर अब फिर लौट आए हैं, एक बार...


विधानसभा चुनाव के रण की रणभेरीयां चहुँ दिशाओं में बज रही हैं। 5 राज्यों में होने वाले इन दिग्गजों के चुनावी रणों में जहाँ क्षेत्रीय पार्टिया सत्ता में है(पुदुच्चेरी को छोड़कर)   राष्ट्रीय पार्टियां गठबंधन में हैं। 

पर इनके सब के बीच बंगाल कुछ नए ही अदांज में हैं। होड़ मची हैं इस गढ़ को फतेह करनी की। वो कहते हैं ना साम, दाम, दण्ड भेद सब पैंतरा चला रहा हैं।


वैसे ये बातें तो होती रहेगी और हो रही हैं। आप सोच रहे होगें यह क्यों शुरू हो गया हैं.... सोचो यार आपका मन हैं। वैसे यार कल कुछ हो गया था वो सोचा बता दूँ...😊


कल शाम को लाइब्रेरी से निकलकर सोचा टहल लेते हैं। यह सोचकर परम सम्मानित राजनैतिक शास्त्र के पेजों में पेन डालकर नीचे आ गया। 

फिर इधर-उधर टहलने लगा तो देखा एक महिला जो गेट से निकल रही और सीढियों से गिर गई, शायद पैर फिसला होगा। भाई हम दूर थे,.... हमनें बस देखा था वो भी बड़े दूर से....

 तो उसके साथ चल रहे लोगों ने संभाल तब तक वो सीढियां से लुढ़क चुकी थी और शायद फैक्चर वगैरह हुआ होगा। 


वैसे हम या हमारे साथी होते तो कुछ न होता धुल झिड़क के उठ खड़े होते। 


चंद सेकण्डों में एम्बुलेंस हाजिर पर हम बड़े खुश हुए किती तरक्की कर रहा हैं। पर........ ये क्या! मैडम जी को बड़ी चोट आई हैं वो उठ तो क्या! हिल-डुल भी नहीं सकती थी। मेरे पास खड़े महाशय ने कहा-"कुछ नहीं, ये इनके हथकंडे हैं।" मै कुछ समझता और उनसे कुछ पूछता वो भी एंबुलेंस की आवाज के साथ गायब हो गए।


 मैं कुछ देर वहीं बैठकर इस बारे में सोचने लगा तभी अचानक तीन-चार सायरन वाली गाड़ियां आई और इधर-उधर पूछताछ करने लगी। एक वर्दीधारी हमारे पास भी आ धमका हम से कुछ पूछता उससे पहले हमनें पूछ लिया-भाईसाहब, इती रात को परेड कर रहे हो मामला क्या हैं? वो बोला आपको पता नहीं हैं-"मेयर मैम, पर अभी-अभी किसी ने हमला किया हैं और उन्हें भारी चोट आई हैं...  वो कुछ पूछ रहा था, पर मैं निर्जीव सा हो गया था और बार-बार उन सजीव हमलावरों को जो मेरे से चंद दूरी पर चुपचाप बैठे थे, जो न तो अपने आप हिल सकते थे और न ही डुल सकते थे। बस टकटकी लगाएं उस गेट और सीढ़ियों देख रहा था, जो इस एक्सीडेंट के जिम्मेदार थे....  

 तभी एक हल्ला सुनाई दिया......  और मेरी तंद्रा टूटी..... 

चारोंं तरफ सुनाई दे रहा था विपक्ष वाले थे, विपक्ष वाले थे...... उनका ही किया धरा हैं ।वो मैम के चुनाव प्रचार में बाधा डालने चाहते हैं।  

मैनें  एक लम्बी साहस ली ,चलो-इन्होंने इन निर्जीव जीवों को तो दोषी नहीं ठहराया। वैसे मुझे ज्यादा भरोसा नहीं हैं पर  ये चुनाव ना होते तो आज शायद यह दरवाजा और पाँच सीढ़ियां हवालात में होते। पर रब का शुक्र हैं, बच गए।


इतने समय अंतराल में जनसंचार के इन नवीन माध्यमों पर लाखों लोग और मिडिया समूह ने अपने-अपने दोषीयों और निर्दोषों का निर्णय  कर चुके थे। और तो और दो साथी अभी-अभी क्रिकेट का मैच साथ बैठे देख रहे थे और एक-दूसरे को तालियां दे रहे थे, वो भी एक-दूसरे के खिलाफ टि्वटर पर आपस में एक-दूसरे को गालियां दे रहे थे।

 बढ़िया हैं.......... अभी असली टिवस्ट् आना बाकी हैं... तो बने रहियेगा, हमारे साथ अपना प्यार सदैव बनाएं रखें। जल्द ही भाग -2 आपके सामने लाने का प्रयास करुंगा...



✍️Ssingh29(प्यार ही मूल हैं💞)


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