नेता जी का विकास....
आज तो सुबह न जाने क्यों जल्दी उठ निकल पड़े सैर पर, ना भाई वो मार्निंग वाक पर। वैसे बिस्तर और हमारा साथ सुबह 10:00 तक तो रहता ही हैं। छोडो खेर इन बातों को आज सुबह घूमने का लुत्फ उठा रहे हैं हम तो ओर मिल गये हमारे दो अजीज मित्र और उनके कुछ लोग जो चर्चा में लीन थे। हम भी जहाँ धमके वहाँ और सुनने लगे उनकी बहस को हम भी पेड़ को सहारा बनाकर खड़े हो गये।सुनने लगे उनको............................ बात शुरू हुई देश के "विकास" के नाम पर।अब थोड़ा सा समय विकास को टटोला- मटोला,दोनों ने बताया हमनें फलां-फंला किया ;दूसरा बोला शुरू तो भाई हमनें किया था तुमनें बस नाम बदला हैं, पहला बोला बदलना भी बहुत बड़ी बात हैं! तुम्हें तो नाम भी नहीं मिल रहे थे वो ही 3-4नामों को बार- बार आगे बढ़ा रहें हो।ये हुई विकास की बात तब लगा यार आज कल एक नामी कोमेडी-शो"----------" बंद हो गया है तो बेचारी जनता का क्या हाल हो गया होगा।(चलो देर सबेरे याद तो किया...) ओर हो गया शंखनाद अपने छुपे हुए कलाकार का...... पप्पू से नामदार तक,सेवक से चौकीदार तक... चौकीदार से चोर, चोर से तानाशाह तक...... ओर कभी बंजरग बलि ...